मंगलवार, 4 फ़रवरी 2020

Mangal dosh Manglik yog, मांगलिक योग/दोष "सच या भ्रांति" एक विश्लेषण:-

❤️Mangal dosh (Manglik yog) मांगलिक योग/दोष  "सच या भ्रांति" एक विश्लेषण:-


🌊🌊🌊🌊🌊🌊🌊🌊🌊🌊

 🌳 क्या मांगलिक योग हमेशा ही वैवाहिक जीवन में  समस्या का कारण बनता है ......???

🌊 क्या कुंडली का मांगलिक होना वैवाहिक जीवन में कोई समस्या देता है या ये सिर्फ भ्रांति है ....???

(एक शोध और अनुसंधानपरक विश्लेषण)

🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁


🍀  हिन्दू समाज मे विवाह संस्कार के अंतर्गत वर अथवा  वधु का मांगलिक होना वैवाहिक जीवन में बहुत ही बड़ी बाधा मानी जाती है और मांगलिक वर या कन्या के लिए विवाह हेतु मांगलिक ही कन्या अथवा वर  को उपर्युक्त माना जाता है .......!!!


🎈  जी हाँ , ये बात सच है कि मंगल जब जन्म कुंडली के विशेष घरो के साथ सम्बंधित हो तो जातक के अंदर विशेष आक्रामक प्रवृति देता है ,  साथ ही  अन्य विशेष ग्रहों और भावो से सम्बंधित होकर जीवन के अलग अलग क्षेत्रो में अतिवादिता  तथा तानाशाही प्रवृति को जन्म देता है ... !


🍀  लेकिन इसके लिए मंगल का  जन्म कुंडली के 1  4  7  8  12 भावों में होना ही आवश्यक नहीं होता बल्कि मंगल जन्म कुण्डली के किसी भी भाव में बैठकर विनाशकारी अथवा घातक  हो सकता है और वहीं किसी भी राशि में स्थित होकर  1 4 7 8 12 भावों में  बैठकर भी सम्पूर्ण सुखी वैवाहिक जीवन दे सकता है .......!!



🌍  मांगलिक योग/दोष  परंपरागत विचार धारा और वास्तविकता :-

🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀

----------------------------------------------------------

💢 परम्परागत ज्योतिष के अनुसार लग्न कुंडली से 1 , 4 , 7 , 8 , 12 भावो में मंगल का होना मांगलिक योग/ दोष बनाता है....!!

वहीं कुछ ज्योतिष के जानकार लग्न कुंडली के साथ चंद्र लग्न से भी इन्हीं भावों में मंगल का स्थित होना मांगलिक दोष मानते है ....!!

💢  कुछ परंपरागत ज्योतिषियों द्वारा ऐसी भी मान्यता है की लग्न कुंडली से 1 , 4 , 7 , 8 , 12 भावों में मंगल  के अतिरिक्त  राहु , केतु , शनि की उपस्थिति  डबल , ट्रिपल मांगलिक योग भी बनाती है ......!

💢 वहीं दक्षिण भारत मे लग्न से द्वितीय भाव ( 2 nd house) में मंगल का होना 

भी मांगलिक योग/दोष माना जाता है ....!!



🌍 क्या है मांगलिक दोष परिहार:-- 

 (कब मांगलिक दोष निष्प्रभावी होता है)         

🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀

----------------------------------------------------------

🌊   परंपरागत ज्योतिष में ऐसी मान्यता है कि जन्म कुंडली  के कुछ विशेष भावो में विशेष राशियों में मंगल का होना अथवा गुरु एवं शुक्र का कुण्डली के विशेष भावों में होना या दृष्टि डालना मांगलिक दोष को निष्प्रभावी बना देता है  अथवा  वर वधु की कुंडली मे दोनों के एक ही भाव( 1 4 7 8 12 ) मे किसी पापी/ क्रूर  ग्रह का होना भी परिहार माना जाता है ....!!


👹👹  लेकिन अधिकांशत:  तथाकथित ज्योतिषी इन परिहारों को नहीं जानते अथवा स्वीकार नहीं करते ......!!!


🤔 एक बहुत ही प्रमुख बात ये है कि जो मांगलिक योग/दोष को  स्वीकार करने वाले ज्योतिष के जानकार हैं  वे स्वयं भी नहीं जानते कि उनके द्वारा मान्य मांगलिक दोष किसी जन्म कुंडली में होने से आखिर होता क्या होता है ...........??


🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂


👹👽   आइये पहले उन भ्रांतियों को समझते है और दूर करते है जो मांगलिक दोष/योग को लेकर समाज मे तथाकथित लोगो द्वारा फैलाई गई है ........!!

💝  फिर आगे उस व्यवहारिक पक्ष को विस्तार से समझेगें  जब मंगल वैवाहिक जीवन मे परेशानियों का कारण बनता है फिर चाहे मंगल जन्म कुंडली के किसी भी भाव में अथवा राशि मरण ही क्यों न विराजमान हो ..................!!!


 🎈  तब क्या करें.......????? 

                 🌎 तब कैसे वैवाहिक मिलान हो ताकि वैवाहिक जीवन सुखी रहे .....!!


इसका भी हल तलाशेंगे .............!!

🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀


🌊 भारतीय समाज मे किसी जातक / जातिका के मांगलिक योग होने पर ये माना जाता है कि :----------

👹👹  भ्रांति  (1)  यदि किसी मांगलिक वर या वधू का विवाह नॉन मांगलिक वर/ कन्या से करते है तो  जीवन साथी की मृत्यु हो जाती है ......... !!!


❣️  (सच्चाई) हमारे जीवन मे होने वाली सभी घटनाएं हमारी जन्म कुंडली के अनुसार होती है ......!!

जातक की स्वयं की जन्म कुंडली से उसकी आयु निर्धारित होती है ......!!

और उसकी स्वयं की जन्म कुंडली ही मृत्यु का कारण और  समय निर्धारित करती है ........!!!!


ये कैसे सम्भव है कि पति की आयु उसकी पत्नी  की जन्म कुंडली निर्धारित करें और उसके ग्रहों के अनुसार जातक जीवित रहे  या मृत्यु को प्राप्त करे .........!!!!


😁 क्या विवाह के पश्चात जातक के स्वयं के ग्रह प्रभावहीन हो जाते है ....???


.🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀


👹👹  भ्रांति (2)  मांगलिक कन्या या वर का विवाह हमेशा विलम्ब से ही होता है .....!!


 ❣️ ( सच्चाई) जी नहीं  हमारे जीवन मे घटित होने वाली सभी घटनाएं जन्म कुंडली में ग्रहों के विशेष सयोंग और उनसे सम्बन्धित मिली दशाओं के आधार पर निर्धारित होती है .....!!!


🍀  जब विवाह का सही सयोंग बनता है और सही समय आता है तभी विवाह होता है ये सयोंग 22 वर्ष की आयु में भी आ सकता है 25 वर्ष या 28 वर्ष या 35 वर्ष की में .........!!!


 जब विवाह का समय सुनिश्चित होता है तब न तो मंगल या शनि ही कुछ कर सकते है और न ही राहु केतु ही  अब तो विवाह होगा ही .... ..!!!


.🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀

👹👹  भ्रांति (3)   मांगलिक जातक आक्रामक स्वभाव के होते है लड़ना झगड़ना उनका स्वभाव होता है ...!!


❣️  ( सच्चाई) प्रमुख बात हमारी प्रकृति और स्वभाव किसी एक ग्रह का किसी भाव मे होने से निर्धारित नहीं होता ...!!


जब मंगल के साथ अधिकांश ग्रह जन्म कुंडली के विशेष भावों से सम्बंधित हो तो जातक का स्वभाव आक्रामक होता है .........


🌎 यदि यहां तृतीय भाव और प्लूटो भी सम्मिलित हो जाये तो व्यक्ति दुःसाहसी बन जाता है  हत्यारे ,आतंकवादी , डकैतों की कुंडली मे ये योग मिलते है ...!!


और इसके लिए मांगलिक होना या न होना महत्त्व नहीं रखता ......


🌊 मंगल किसी भी भाव मे बैठकर इस संयोग में सम्मिलत होकर  व्यक्ति को आक्रामक बना सकता है ....!!!


.🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀

👹 👹 भ्रान्ति (4):-  मंगल के अष्टम और द्वादश भाव मे जाना या शुक्र के साथ युति करना  विवाहेत्तर सम्बन्धो को जन्म देता है ...!!


❣️   (सच्चाई) :-  विवाहेत्तर सम्बन्ध , multipal relationship , सौतन , Prostitutions , आक्रामक यौन व्यवहार , संकीर्ण यौन व्यवहार , समलैंगिता ,  स्वयं की इच्छा से बने  सम्बन्ध , बिना इच्छा से बने सम्बन्ध , जबरन यौन व्यवहार , यौन उत्पीड़न .......


इन सभी के लिए जन्म कुंडली मे बहुत ही विशेष स्थितियाँ और संयोग होते है ....!!


🌍  जिन्हें जन्म कुंडली मे स्पष्ट रूप से अलग अलग देख सकते है और विश्लेषित कर सकते है ......!!!


🌍 इनका न मंगल + शुक्र युति से कोई लेना देना  होता  है न ही राहु + मंगल +  शुक्र युतियों से ....!!!


🦋 अष्टम और द्वादश भाव मे भी बैठा मंगल भी उतना ही योगकारक और सकारात्मक हो सकता है जितना केंद्र या त्रिकोण का स्वामी होकर केंद या  त्रिकोण में बैठा हुआ मंगल .....!!!


👹  आज मांगलिक योग  / दोष के नाम से भय दिखाने वालों की , भ्रमित करने वालों की और पूजा अनुष्ठान से मांगलिक दोष को समाप्त करने वालों की भीड़ लगी है .....!!


🌹 लेकिन प्रश्न ये है कि जिसे आपको दोष बताया जा रहा है और आपसे दोष को समाप्त करने की गारंटी दी जा रही है  क्या वास्तव में वह वैवाहिक जीवन में समस्या का कारण है भी या नहीं .....!!


🌊  जन्म पत्रिका में कोई ग्रह अशुभ तभी माना जा सकता है जब  उसके परिणाम शुद्ध विश्लेषण में अशुभ आएं ....!!


किसी ग्रह के किसी भाव में या राशि मे स्थित होने  से वह ग्रह अशुभ नहीं हो जाता .....!!!


                 शेष अगले भाग में ..


                                          आगे ......!!!


🍀  1)  कब मंगल  वैवाहिक जीवन मे समस्या का कारण बनता है .....!!!


🍀  2) यदि मंगल वैवाहिक समस्या बताता है तो विवाह में कुंडली  मिलान कैसे हो ....!!


🍀   3) कब किन संयोगों में मांगलिक विवाह अथवा नॉन मांगलिक विवाह भी  नही किया जाना चाहिए ....!!


🌊  जन्म कुंडली जीवन का स्कैन है जिसमे सभी अच्छे या बुरी स्थितियों को देखा जा सकता है .......!!

ज्योतिष शास्त्र का सर्वोत्तम व्यवहारिक उपयोग यही है कि हम आज ..! 

आने वाले कल के लिए जीवन का बेहतरीन प्रबन्धन (management) कर सकें ..........!!!


🌊  कुछ आसान , आवश्यक और सही समय पर किये गए सही उपाय , कुछ जन्म  पत्रिका के अनुसार सकारात्मक ग्रहों का सहयोग तथा  सही मार्ग का चयन और सही दिशा में किया गया परिश्रम....!!  


🌊  सुखी और खुशियों से भरा जीवन दे सकता है .................!!!

                     

❣️ Aacharya Upendra S. Bhatt                                   

                 Whatsapp No ::--  9414204610

"Works at  advanced  &  practical Astrology"

【हिन्दू वैदिक ज्योतिष , जैमिनी ज्योतिष , नाड़ी ज्योतिष और ताजिक system  ( वर्षफल पद्धति】


🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

Please do not enter any spam link in tha comment box.

close